बातों की बात

वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी. बड़ी लाडली और बड़ी प्यारी. जब बड़ी हुई तो माता-पिता को उसकी शादी की चिंता सताई. पर क्यूंकि बेटी को इतने प्यार से पाला था, वह नहीं चाहते थे की वह उसे इस बारे में खुद की तस्सली होने तक कुछ भी बताये.
जब खुद आश्वस्त हो गए तो उन्होंने एक लड़के के बारे में उसे बताया. वह डरी. परन्तु लाड-प्यार ने उसे बागी नहीं बनने दिया.वह कुछ बोल न सकी. इसी में सबने उसकी हामी समझली.
माँ ने कहा, ' बेटी, मिलने से पहले अगर बात करना चाहो तो फ़ोन पे बात कर लो.' वह घबरा गयी.
दरअसल उसकी पसंद कुछ और ही थी. फिर उसने सोचा की अगर मैं अब मना नहीं करुँगी तो यह सबके साथ धोखा होगा. तो वह सकुचाते हुए उनसे बोली, ' मैं फ़ोन पे बात नहीं करना चाहती.' लेकिन अभी भी वह उसकी बात न समझे. सब उसे समझाने लगे की बात करने में कोई हर्ज़ नहीं. पहले बात करलो फिर मिल भी लेना.
अब तो जैसे उसके सब्र का बांध टूटने लगा.
तो स्पष्ट शब्दों में बोली, ' मेरी पसंद कोई और है.' तो इसके आगे दस सवाल हुए- कौन है? क्या करता है? शादी करेगा? उसके घरवाले मानेंगे? इतनी पूछताछ के बाद तस्सली तो हुई पर सामाज के डर ने उन्हें पीछे हटने को उकसाया. बेटी को समझाया की समाज ऐसे रिश्तों को अच्छी नज़र से नहीं देखता. बहुत मुश्किल होगी. पर लड़की ने भी हिम्मत दिखाई तो माता-पिता मान गए. और अब वही हालात फिर से थे. वह दोनों बात करना चाहते थे. मिलना चाहते थे. पर सबने समझाया की बात करना, मिलना अच्छी बात नहीं. लोग क्या कहेंगे?

तो आप ही बताईये- हालात वही, तो फिर अब समाज की दुहाई क्यों?

5 comments:

  1. hmm really nice article!
    truely brings out the sarcasm of society..

    m really impressed by your choice of topic and your depiction of the story. great work done..

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  2. Apne aapko samast bandhano se azaad karo aur jiyo jee bhar ke...Kal kisne dekha !

    Jab bhavishya kee gaurantee kisi ke paas nahin hain to sabkee itnee kya sochna....swayam ka decision lo...ho sakta hain kee yeh ant main shayad galat sabit ho....lekin iska samast uttardayitva phir aap per hoga....

    Your life...so u must own up decisions...

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  3. will definitely follow ur advice..thnx!!

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