वो उटपटांग शिक्षक

वो उटपटांग शिक्षक था जिसने..
न कभी अपने प्रिय शिष्यों को कुछ सिखाया..
न खुद कभी कुछ सीखा..

हाथो में वो दम था की किसी की भी नाक तोड़ दे..
पर दिमाग में इतना भी नहीं की बच्चो पे अपना प्रभाव छोड़ सके..
सारे साल पढ़ाता रहा वह वही दो पन्ने..
और बोले..
बच्चों पढ़ो अब अपने मन से..

फिर आया परीक्षा का दिन..
सब डरे रहे..
की क्या पढ़े और क्या नहीं..
फिर भी सबने अपने दिमागों में तफरी मचा दी..
और पहुंचे पूरे जोश में..

पर जब हाथ में आया पर्चा..
तो माथा ठनका..
लगे सर पीटने...
यह भी कोई पेपर बनाया..
नामुमकिन था एक घंटे में करना..
और नक़ल करना बेकार..
क्यूंकि नहीं आता किसी को भी वो सवाल..
जो दिया है किसी किताब से छाप के आज..

कोई नहीं हम तो फिर से मेहनत करके पास होने की कोशिश कर लेंगे..
पर निवेदन है उनसे..
की न सनके वो कापियां जांचने के साथ!!

4 comments:

  1. dis iz nt nw fr ME Deptt..bt nyway gud way of bursting out d frustration.....send d link to d respective teacher...:)

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  2. he he he...wahi to nahi kar sakte..isiliye to yaha likha..and may be dats y u gave anonymous comment ;)..bt anyways thanx..

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